इस बार फूल वाली से प्यार कर बैठे
4 मई 2025 | गुमनाम कवि
यह कविता एक बेहद भावुक और सादगी से भरी प्रेम कथा को व्यक्त करती है, जहां एक फूल बेचने वाली लड़की और एक भोले भाले प्रेमी के बीच एकतरफा लगाव का चित्रण है। गुमनाम कवि ने प्रतीकों और कल्पनाओं के माध्यम से मोहब्बत के सुंदर एहसास को शब्दों में ढाला है।
इस बार फूल वाली से प्यार कर बैठे,
हम उनका प्रस्ताव स्वीकार कर बैठे।
वे फूल बेच रहे थे मुस्कुराकर इसलिए,
हम उनकी दुकान में उधार कर बैठे।।
देखा गया हर एक ख्वाब रंगीन होना चाहिए,
जिस बाग में हम रहें बेहतरीन होना चाहिए।
माना भंवरे का हर फूल पर मंडराना गुनाह है,
पर तुम्हे अपने भंवरे पर यकीन होना चाहिए।।
बाग में फूलों को दीवाना बना रही हैं तितलियां,
कुछ ही फूलों पर आशियाना बना रही हैं तितलियां।
खिलना तो चाहते हैं छोटे – छोटे फूल भी लेकिन,
बड़े-बड़े फूलों को निशाना बना रही हैं तितलियां।।
फूलों के बिना सावन कैसे हो सकता है?
यहाँ हर फूल पावन कैसे हो सकता है?
भँवरा पी जाता है फूल से मीठा रस,
दृश्य इतना मनभावन कैसे हो सकता है?
भावार्थ: यह रचना केवल एकतरफा प्रेम नहीं, बल्कि उस निश्चल और निस्वार्थ भाव की कहानी है, जो किसी की मुस्कान से शुरू होती है। फूल, भंवरे, तितलियां और नदी जैसे प्रतीक प्रेम के विभिन्न रूपों और इच्छाओं को दर्शाते हैं। यह कविता सरल शब्दों में गहराई लिए हुए है।
लेखक टिप्पणी: यह कविता ‘गुमनाम कवि’ द्वारा लिखी गई है, जो प्रेम को प्रकृति और प्रतीकों के माध्यम से अभिव्यक्त करने में विश्वास रखते हैं। उनकी रचनाओं में भावनाओं की गहराई और कल्पनाओं की उड़ान देखने को मिलती है


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