रिसते हुए ज़ख्म लेकर जिंदा हूँ – भूपेन सोनी





रिसते हुए ज़ख्म लेकर जिंदा हूँ – भूपेन सोनी | Shabd Sahity


रिसते हुए ज़ख्म लेकर जिंदा हूँ

– भूपेन सोनी

रिसते हुए ज़ख्म लेकर जिंदा हूं..

जिंदगी के सितम लेकर जिंदा हूं..

मेरे ये हौसले ही अब तो मरहम है,

यह दिल में वहम लेकर जिंदा हूं..

इस जंग में गिरकर फिर उठता हूं,

लड़खड़ाते कदम लेकर जिंदा हूं..

शिकस्त के डर से पीछे नहीं हटना,

खुद से यह कसम लेकर जिंदा हूं..

कभी तो तकदीर मेरी ये पलटेगी,

दुआओं में ये भरम लेकर जिंदा हूं..

कईं लोगों की दुआं में हूं शामिल,

कुछ तो अच्छे करम लेकर जिंदा हूं..

हर किसी से दर्द जब ना बयान हो,

मैं ये कागज कलम लेकर जिंदा हूं..

– भूपेन सोनी

इस कविता में कवि अपने जीवन के संघर्ष और हिम्मत का बखान कर रहे हैं। वह बताते हैं कि भले ही उन्हें जीवन में कई चोटें लगी हों, कठिनाइयाँ झेली हों, फिर भी वे जिंदा हैं और अपने हौसलों के सहारे आगे बढ़ रहे हैं। “रिसते हुए ज़ख्म” जीवन के अनुभवों, असफलताओं और मानसिक पीड़ा का प्रतीक है, लेकिन उनका आत्मविश्वास और उम्मीद उनकी मरहम है।

कवि कहते हैं कि गिरना और फिर उठना जीवन का नियम है। हर लड़ाई में, चाहे वह जीवन की हो या मन की, ठोकरें खाकर भी व्यक्ति अपने कदमों को संभाल सकता है। “लड़खड़ाते कदम” असली जीवन संघर्ष और हिम्मत का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि डर और असफलता से पीछे नहीं हटना चाहिए।

“खुद से यह कसम लेकर जिंदा हूं” पंक्ति में आत्म-संयम और आत्म-निर्णय का भाव छुपा है। कवि ने खुद से वादा किया है कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, वे जिंदा रहेंगे और आगे बढ़ेंगे। यह पंक्ति जीवन में आत्म-प्रतिबद्धता और संघर्ष की महत्ता को दर्शाती है।

कवि यह भी बताते हैं कि जीवन में कभी-कभी तकदीर पलट सकती है। इसका मतलब है कि आशा और विश्वास के साथ यदि हम मेहनत करते रहें, तो हमारा जीवन धीरे-धीरे सुधार की ओर बढ़ सकता है। “दुआओं में ये भरम लेकर जिंदा हूं” से यह पता चलता है कि कवि दूसरों की शुभकामनाओं और समाज की सकारात्मक ऊर्जा में विश्वास रखते हैं।

आगे कवि कहते हैं कि कुछ अच्छे कर्म उनके जीवन में मौजूद हैं, जो उन्हें कठिनाइयों के बीच भी जिंदा रखने में मदद करते हैं। हर किसी से दर्द का खुलकर बयान न होने के बावजूद, कवि अपने भावों और अनुभवों को लिखने के माध्यम से साझा करते हैं। “कागज कलम लेकर जिंदा हूं” यह दिखाता है कि अभिव्यक्ति, लेखन और आत्म-अवलोकन उनके जीवन की ताकत है।

कुल मिलाकर, यह कविता जीवन की कठिनाइयों में हिम्मत, संघर्ष, आत्म-निर्भरता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। यह हर पाठक को संदेश देती है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन हों, अपने हौसले, अपने अनुभवों और अपने कर्मों के सहारे हमेशा आगे बढ़ते रहो।

कवि ने इसे सरल और भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया है ताकि हर कोई इसे अपने जीवन से जोड़ सके और प्रेरणा प्राप्त कर सके। इस कविता का मूल भाव यही है कि जिंदा रहना, संघर्ष करना और उम्मीद बनाए रखना ही जीवन की असली सफलता है।


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