राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2005
पाँच दिशानिर्देशक सिद्धांतों का वृत्ताकार डायग्राम
NCF 2005
1
ज्ञान को जीवन से जोड़ना
2
रटंत विद्या से स्थानांतरण
3
पाठ्यक्रम समृद्धि
4
लचीला मूल्यांकन
5
लोकतांत्रिक पहचान
1 ज्ञान को जीवन से जोड़ना
यह सिद्धांत शिक्षण को वास्तविक जीवन की स्थितियों और अनुभवों से जोड़ने पर बल देता है। ज्ञान का संबंध विद्यार्थियों के दैनिक जीवन से होना चाहिए न कि केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रहना चाहिए। इससे सीखना अधिक अर्थपूर्ण और प्रासंगिक बनता है।
2 रटंत विद्या से स्थानांतरण
NCF 2005 रटने (rote learning) के स्थान पर समझ आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण पर जोर देता है। इसका उद्देश्य बच्चों में गहन समझ, आलोचनात्मक चिंतन और समस्या समाधान क्षमता विकसित करना है, न कि केवल तथ्यों को याद करने तक सीमित रखना।
3 पाठ्यक्रम समृद्धि
इस सिद्धांत के अनुसार पाठ्यक्रम को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़ाकर समग्र बाल विकास के लिए समृद्ध किया जाना चाहिए। इसमें कला, शारीरिक शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा और शांति शिक्षा जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
4 लचीला मूल्यांकन
NCF 2005 परीक्षा प्रणाली में सुधार की वकालत करता है, ताकि यह कक्षा जीवन का अभिन्न अंग बन सके न कि तनाव का स्रोत। इसके तहत निरंतर और व्यापक मूल्यांकन (CCE) पर जोर दिया गया है जो विद्यार्थियों के समग्र विकास का आकलन करता है।
5 लोकतांत्रिक पहचान
यह सिद्धांत देश की लोकतांत्रिक राजनीति के भीतर देखभाल और चिंता से informed एक अतिव्यापी पहचान के पोषण पर जोर देता है। इसमें समानता, न्याय, धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्रता जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता विकसित करना शामिल है।

Leave a Reply