चाँद | खामोशी में बसी कविता – सलोनी खन्ना





चाँद की चमक | सलोनी खन्ना

चाँद की चमक

26 जुलाई 2025 | सलोनी खन्ना

चाँद की चमक है जब तेरी आँखों में,  
फिर ग़म कैसा तेरी मीठी बातों में?

सितारे भी नज़रें चुराते हैं रातों में,  
जब तुम नहीं दिखते इन नज़ारों में।

बादल उमड़-घुमड़ कर बरसते हैं,  
तेरी याद में भीग-भीग कर रोते हैं।

चली आओ तुम हवा बनके,  
इन भीगी-भीगी बरसातों में।

महक जाए मेरा जहां, तेरी सुनहरी यादों में,  
तेरा एहसास इक जादू है, सुकून है बातों में।
  

📖 भावार्थ:
यह कविता प्रेम, प्रतीक्षा और स्मृतियों की सुंदर झलक देती है।
कवयित्री कहती है कि जब प्रिय की आँखों में चाँद जैसी चमक हो, तो कोई भी दुःख टिक नहीं सकता।
उसके बिना यह दुनिया अधूरी लगती है, सितारे भी जैसे नज़रें चुरा लेते हैं।
यादें बादलों की तरह उमड़ती हैं, मन की आँखों से बरसती हैं।
कवयित्री चाहती है कि प्रिय हवा बनकर इन बरसातों में लौट आए।
उसकी यादें जैसे जादू हैं — जो जीवन को सुकून से भर देती हैं।

✍️ लेखक टिप्पणी:
यह कविता “चाँद की चमक” केवल प्रेम का इज़हार नहीं, बल्कि उसकी कोमलता, गहराई और आत्मिक सौंदर्य को दर्शाती है।
हर पंक्ति में प्रकृति और भावना का सुंदर संगम है — चाँद, सितारे, बादल और बरसात प्रेम के वाहक बनकर उभरते हैं।


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