भंवरे की बदमाशियाँ – कविता


भंवरे की बदमाशियाँ

सुबह – सुबह बहुत सुकून , देती हैं अंगड़ाइयाँ ,
खुशबू फैली चारों तरफ , छाई मदहोशियाँ।
कलियां क्या जाने , मुहब्बत किसे कहते हैं ,
किसी फूल से पूछिए , भंवरे की बदमाशियाँ।।


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